साहित्य क्लश पठानकोट इकाई की ओर से हिंदी दिवस के उपलक्ष्य पर ऑनलाइन राष्ट्रीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें जालंधर दूरदर्शन की हिंदी अधिकारी व राजभाषा सचिव सुषमा गुप्ता मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित हुई जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के संस्थापक सागर सू द ने की पठानकोट इकाई के अध्यक्ष डॉ मनु मेहरबान ने कहा 14 सितंबर को पूरे भारतवर्ष में हिंदी दिवस मनाया जाता है इसी दिन केंद्र सरकार ने इसे राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था उन्होंने कहा कि हमें हिंदी बोलने में संकोच नहीं करना चाहिए और आज पूरे विश्व में हिंदी बोलने वालों की तादाद में लगातार बढ़ोतरी हुई है भविष्य के 160 विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाती है हिंदी हमें एक सूत्र में बांधे रखती है उन्होंने कहा कि भाषा को धड़कनों में जिए जा रहा हूं मैं हर शब्द का अमृत सा पिए जा रहा हूं मैं मुख्य अतिथि जालंधर दूरदर्शन की हिंदी अधिकारी सुषमा गुप्ता ने हिंदी दिवस पर कविता चलो हिंदी दिवस मनाए हम अपनी तो संस्कृति है इस में रामायण सी कृति है इसमें गीता उपदेश सुनाएं हम चलो हिंदी दिवस बनाए हम इसकी व कहा कि साहित्य कलश जो कार्य कर रहा है वह अतुलनीय है व नई पीढ़ी को साथ छोड़ने का जो प्रयास किया जा रहा है वह प्रशंसनीय कदम है कोहिमा नागालैंड से आशीष कुमार ने हिंदी दिवस पर अपनी रचना पेश कर हिंदी के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की वहीं अरुणाचल प्रदेश से अनु ने कहां की हिंदी सबके मन को भाती है और इसे हमें नई शब्दों का पता चलता है और उन्होंने अपनी एक रचना प्रस्तुत की सिवान बिहार से कुमारी सुअंबदा ने कहा हिंदी संस्कृत की पुत्री है जिसे संस्कृत भाषा व साहित्य का अनंत विरासत इसे सहज ही प्राप्त है और यह भी एक सुखद संयोग है कि वैज्ञानिक युग में हमारे पास हिंदी जैसी वैज्ञानिक भाषा है नन्ही कवित्री वान्या ने महादेवी वर्मा की रचना आंधी आई जोर शोर से डाली टूटी है झं कौर से उड़ा घोसला अंडे फूटे किससे दुख की बात कहेगी अभी यह चिड़िया कहां रहेगी प्रस्तुत की तो सब ने उसका करतल ध्वनि से अभिनंदन किया लखनपुर जम्मू कश्मीर से डॉक्टर सुनीता शुक्ला ने हिंदी दिवस पर अपनी रचना प्रस्तुत की आदर्श भारतीय महाविद्यालय से सुनैना व कंचन ने भी अपनी रचना प्रस्तुत की जलगांव महाराष्ट्र से डॉ प्रियंका सोनी ने हिंदी दिवस पर अपने विचार प्रस्तुत किए संस्थापक सागर सूद ने सब का आभार व्यक्त किया व कहा कि साहित्य कलश का मुख्य उद्देश्य युवा साहित्यकारों को साथ जोड़ना है वह अपनी राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य करना है मंच संचालन का दायित्व डॉक्टर मनु मेहरबान ने निभाया

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