हाई कोर्ट किसानों के लिए चुप क्यों-बुआ सिंह

देशव्यापी किसान आंदोलन के कारण किसानों में बढ़ रही बेचैनी,हाहाकार ने साबित कर दिया है कि केंद्र की मोदी सरकार अन्नदाता किसान विरोधी है। केंद्र सरकार किसानों को आत्महत्या करने के लिए कैसे मजबूर कर रही है। पंजाब तथा हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य जज श्री रविशंकर जी द्वारा आंदोलनकारी किसानों द्वारा रेलवे तथा सड़क मार्ग बंद किए जाने पर पंजाब सरकार को लगाई फटकार ने यह साबित कर दिया है कि हमारी अदालतें भी केंद्र सरकार के तर्ज पर ही काम करती आ रही हैं। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को किसानों की मांगों के बारे में कोई जानकारी नहीं। हाई कोर्ट तो सिर्फ राज्य सरकार को भी सख्त से सख्त आर्डर जारी करके पंजाब सरकार को संविधान अनुसार ना चलने के लिए दोषी ठहरा रही है। ऑल इंडिया भारतीय सेवा दल के चेयरमैन सरदार बुआ सिंह ने आज स्थानीय दफ्तर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के जजों ने नहीं चलानी है। सरकार तो लोगों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों ने चलानी है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चलानी है। राज्य सरकार द्वारा लोकहित में आदेश जारी किए जाते हैं तथा लोक हित में ही कानून बनाए जाते हैं। किसानों के विरुद्ध पंजाब सरकार नहीं जा सकती। हाईकोर्ट यह भली-भांति जानती है कि किसान भी पंजाब के निवासी हैं। सरदार बुआ सिंह ने भारत के चीफ जस्टिस से मांग की है कि किसान हित में केंद्र सरकार को बनाए गए कानून ऑर्डिनेंस वापस लेने हेतु आदेश जारी करें। अगर किसान ही नहीं रहेंगे तो देश भी नहीं रहेगा। लोग हैं तो देश है। केंद्र की मोदी सरकार को संविधान के अनुसार काम करना चाहिए। भारत में लोकतंत्र है डिक्टेटरशिप नहीं। सरकार चुने गए प्रतिनिधि ही चलाते हैं, अदालतें नहीं। अदालत को इंसानियत को सम्मुख रखकर आदेश जारी करने चाहिएं। नहीं तो संविधान की प्रभुसत्ता,अखंडता, धर्मनिरपेक्षता, नागरिकों के मौलिक अधिकारों को भारी नुकसान पहुंचेगा। इस अवसर पर जीवन सिंह, पिंदरपाल, अशोक कुमार, धर्मपाल, चुन्नीलाल, विशाल, हिम्मत सिंह, सुशील कुमार काला, अभिनव कुमार, सुभाष चंद्र, रूपलाल,गुरमेज सिंह, श्याम सिंह, भूषण कुमार, एसएस पिंदर, सुनील कुमार इत्यादि उपस्थित थे।

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