सोमवार को जहां एक तरफ जम्मू में पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के तिरंगे झंडे को लेकर कहे गए आपत्तिजनक शब्दों के खिलाफ प्रदर्शन हुआ, वहीं पीडीपी को महबूबा के इन बयानों की भारी कीमत चुकानी पड़ी.

जम्मू कश्मीर में महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी को तगड़ा झटका लगा है। सोमवार को पीडीपी नेता टीएस बाजवा, वेद महाजन और हुसैन ए वफा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को लिखे एक पत्र में इन नेताओं ने कहा है कि उनके कुछ कार्यों और विशेषकर उनके कुछ बयान जो कि देशभक्ति की भावनाओं को आहत करने वाले हैं और उन्हें असहज महसूस करा रहे हैं। दरअसल, महबूबा मुफ्ती ने पिछले दिनों एक बयान दिया था कि जब तक जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधान दोबार से लागू नहीं हो जाते हैं तक वह कोई भी झंडा नहीं थामेंगी।

अपने आवास पर संवाददाताओं से कहा था, जहां तक पीडीपी की बात है, तो अब हम अकेले नहीं हैं। अगर आप को याद हो, तो हमने नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ (2018) पंचायत चुनाव से पहले एक संयुक्त रुख अपनाया था कि हम उसमें भाग नहीं लेंगे। इस बार भी हम पार्टी के भीतर, अपने कार्यकर्ताओं से इस पर चर्चा करेंगे, और फिर पीपुल्स एलायंस (फॉर गुपकर डिक्लेयरेशन) में इस पर चर्चा करेंगे। हम वहां जो निर्णय लेंगे, वह सब पर लागू होगा। उन्होंने कहा था, जहां तक मेरी बात है, तो मुझे चुनाव में कोई दिलचस्पी नहीं है। जब तक वह संविधान हमें वापस नहीं मिल जाता जिसके तहत मैं चुनाव लड़ती थी, महबूबा मुफ्ती को चुनाव से कोई लेना देना नहीं है।

बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा तिरंगे झंडे को लेकर दिए गए बयान को लेकर पार्टी के खिलाफ जम्मू में कई संगठनों ने प्रदर्शन किया। बीजेपी और कांग्रेस ने भी पीडीपी प्रमुख को घेरा। कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र शर्मा ने कहा कि ऐसे बयान किसी भी समाज में बर्दाश्त करने लायक नहीं हैं और अस्वीकार्य हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज देश के सम्मान का प्रतीक है।

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