स्टेट पैंशनर ज्वाइंट फ्रंट की ओर से सीनियर कन्वीनर नरेश कुमार की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें जिलाध्यक्ष रामदास, विक्रमजीत, मास्टर सत्य प्रकाश, डा.लेखराज, प्रिंसिपल मंगलदास एवं चौधरी लाल चंद के अलावा सहायक रजिस्ट्रार अशोक शर्मा उपस्थित हुए। इस दौरान 7 अक्टूबर की वित्त मंत्री मनप्रीत बादल से अपनी मांगों के संबंध में पंजाब यू.टी मुलाजिम और पेंशनर सभा फ्रंट के प्रांतीय कन्वीनरों के साथ हुई बैठक संबंधी विचार विमर्श किया गया। इस दौरान दौरान वक्ताओं ने कहा कि बेशक सरकार ने मुलाजिमों का मोबाइल भत्ता नवम्बर महीने से बहाल करने का भरोसा दिया है, परन्तु 1-1-2016 से लागू होने वाले पे-कमिशन, डी.ए की किश्तों और बकाए जारी के बारे में, मेडिकल भत्ते में बढ़ोतरी के बारे में, पुरानी पैंशन स्कीम लागू करने, अस्थायी कर्मियों को स्थायी करने और अन्य कई मांगों को वित्त मंत्री की ओर से आर्थिक मंदी की आड़ में लटकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार आर्थिक दिवालिया के कगार पर है तो सरकार अपने फालतू खर्चों पर रोक लगाए और विधायकों व मंत्रियों को एक से ज्यादा दी जा रही पैंशनों को बंद करें क्योंकि 1-1 विधायक और मंत्री को 6-6 या 7-7 पैंशनें जारी करना सरकारी खजाने की सीधी लूट है। उन्होंने प्रांतीय कमेटी से अपील की कि फ्रंट को और मजबूत करने के लिए हर छोटी बड़ी यूनियन, एसोसिएशन, मंच व जत्थेबंदी को फ्रंट में शामिल किया जाए। इस अवसर पर चमन गुप्ता, हंसराज सिंह, बलदेव राज, मास्टर तरसेम, रणजीत गुलेरिया, डा.अमरजीत, रमेश कुमार, जगदीश कोहली, युद्धवीर सैनी, गुरमीत सिंह, तारा चंद, मास्टर सुलखन सिंह, जगदीश, रवेल सिंह आदि उपस्थित थे।

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