खेतों में अवशेष को आग लगाने से पैदावार क्षमता में आने लगती है गिरावट

जि़ला पठानकोट में भले ही बहुत कम मामले पराळी को आग लगाने के सामने आते हैं, जि़ला पठानकोट में श्री संयम अग्रवाल जिलाधीश पठानकोट के आदेशानुसार व डा. हरतरनपाल सिंह मुय कृषि अधिकारी पठानकोट के नेतृत्व में विशेष मुहिम चलाई जा रही है जिस अधीन किसानों को पराळी व गेहुँ के अवशेषों को आग न लगाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। जि़ला पठानकोट में जागरूक किसानों की संया बहुत हैं जिन की तरफ से पिछले लंबे समय से अपने खेतों में फसलों के अवशेष को आग नहीं लगाई गई एक इस तरह का किसान है गाँव माहीचक्क (कटारू चक्क) जि़ला पठानकोट का निवासी स. सतनाम सिंह पुत्र स. रणजीत सिंह जिस ने पिछले लंबे समय से खेतों में फसलों के अवशेष को आग नहीं लगाई और पहले की अपेक्षा और ज्यादा पैदावार करके दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बना हुआ है।जानकारी देते किसान सतनाम सिंह ने बताया कि वह पिछले करीब 4-5 सालों से किसान भलाई विभाग के सहयोग से दी गई तकनीकों आदि से कृषि कर रहा है, इसके अतिरिक्त आत्मा स्टाफ व कृषि विभाग की गतिविधियों में हिस्सा ले रहा है। उन्होंने बताया कि इस समय उस के पास 5 एकड़ अपनी ज़मीन है और करीब 8 एकड़ ज़मीन रहण पर ले कर खेती कर रहा है। उन्होंने बताया कि खेती के अतिरिक्त उस ने पशु पालन धंधे को भी अपनाया है। जिस से उसे काफ़ी लाभ हो रहा है।किसान ने बताया कि उस की तरफ से पिछले लंबे समय से अपने खेतों में फसलों के अवशेष को आग नहीं लगाई। जिस के चलते वह पहले की अपेक्षा अधिक पैदावार ले रहा है। उन्होंने बताया कि साल 2016 से ले कर आज तक पराळी व गेंहुँ के अवशेष को बिना आग लगाए गेहूँ की बिजाई और धान की कासत कर रहा है।उन्होंने बताया कि उनको आज तक पराळी की कोई समस्या नहीं आई, गुजऱ भाईचारे के साथ अच्छे संबन्ध होने के कारण, उनकी तरफ से पराळी उठा ली जाती है और इस के बदले में उनको देसी खाद उनको मिल जाती है। इस के अतिरिक्त शेष अवशेष जो खेतों में रह जाता है उसे खेतों में ही टैक्टर की सहायता से खेत में मिला दिया जाता है इस से यहां मिट्टी की सेहत में विस्तार हुआ वहाँ फ़सल की पैदावार और गुणवत्ता में भी विस्तार हुआ है।  सतनाम सिंह ने बताया कि पराळी और नाड़ी को खेतों में आग लगाने से यहां ज़मीन की पैदावार क्षमता कम होती है वहाँ बहुत से मित्र कीट जो फसलों के लिए वरदान हैं वह भी नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने अन्य किसानों को भी अपील करते कहा कि सरकार की इस मुहिम में अपना सहयोग दें और निश्च्यि कर लें कि आज के बाद कभी भी खेतों में फसलों के अवशेष को आग नहीं लगाएंगे। उन्होंने बताया कि कृषि विशेषज्ञ डा. अमरीक सिंह की तरफ से समय समय पर जागरूकता कैंप लगा कर उनको जागरूक किया जाता है जिस के चलते वह अधुनिक तकनीकों के साथ खेती कर रहे हैं।
फोटो कैप्शन (8अक्तूबर 1) जानकारी देते किसान सतनाम सिंह निवासी गाँव माहीचक्क जि़ला पठानकोट।

error: Content is protected !!