इन तीनों बिल को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है. जहां विपक्ष इन बिलों को किसान विरोधी बता रही है वहीं सरकार का कहना है कि ये किसानों के हित में हैं.

इस सप्ताह लोक सभा में कृषि क्षेत्र से जुड़े तीन अहम विधेयक पारित हुए, जिसे लेकर पंजाब और हरियाणा में ज़बर्दस्त विरोध देखा जा रहा है. उत्तर प्रदेश में भी कहीं-कहीं किसान इसका विरोध कर रहे हैं.

लेकिन बीते साल किसान मार्च के लिए चर्चा में रहने वाले महाराष्ट्र और तीन साल पहले किसानों के हिंसक आंदोलन के लिए ख़बरों में रहे मध्यप्रदेश और दूसरे राज्यों से कृषि बिल के विरोध की ख़बरें कम ही मिल रही हैं.

क्या वाकई कुछ राज्यों को छोड़ कर अन्य जगहों पर इन तीन विधेयकों का उतना विरोध नहीं हो रहा? और अगर वाकई ऐसा है तो इसके पीछे क्या वजह है?

इसके विरोध में पंजाब में ख़ुद बीजेपी की सहयोगी पार्टी अकाली दल ने पार्टी का साथ छोड़ने का फ़ैसला किया है. हरियाणा में सीएम मनोहर लाल खट्टर ने सफाई दी है कि ये बिल किसान विरोधी नहीं है.

कृषि से जुड़े विधेयकों का पंजाब में काफी विरोध हो रहा है क्योंकि किसान और व्यापारियों को इससे एपीएमसी मंडियां समाप्त होने की आशंका है. यही कारण है कि प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों ने कृषि विधेयकों का विरोध किया है. इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने कृषि से जुड़े विधेयकों के विरोध में मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है. शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने गुरुवार को लोकसभा में कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020 और मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा विधेयक 2020 का विरोध किया. इसके बाद मोदी सरकार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.

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