कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज के अंग निकालने समेत विभिन्न अफवाहें कथित रूप से सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही हैं, जो पंजाब में स्वास्थ्य विभाग के लिए सिरदर्द बन गईं हैं। इन अफवाहों की वजह से कुछ स्थानों पर ग्रामीण स्वास्थ्य र्किमयों को नमूने नहीं लेने दे रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे इस तरह की फर्जी खबरों के झांसे में नहीं आएं और संक्रमण का जल्दी पता लगाने के लिए जांच कराएं। अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि गुर्दा आदि अंग निकालने की अफवाह के अलावा यह भी फैलाया जा रहा है कि सरकारी अस्पतालों में खराब सुविधाएं हैं और स्वास्थ्य र्किमयों तथा डॉक्टरों को व्यक्ति को संक्रमित घोषित करने के लिए पैसे दिए जाते हैं। 
अधिकारियों ने बताया कि संगरूर, मोगा और अन्य इलाकों में पिछले कुछ दिनों के दौरान ग्रामीणों ने स्वास्थ्य र्किमयों को नमूने लेने के लिए गांव में प्रवेश नहीं करने दिया। अधिकारियों के मुताबिक, संगरूर और मोगा में कुछ गांवों ने प्रस्ताव तक पारित कर दिए हैं जिनमें कहा गया है कि कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने पर वे किसी भी व्यक्ति को अस्पताल नहीं भेजेंगे, बल्कि मरीज को घर में या गांव के साझे स्थान पर पृथकवास में रखा जाए। मोगा जिले के एक अधिकारी ने बताया कि लोग इसलिए भी डर रहे हैं कि उन्हें लग रहा है कोरोना वायरस की जांच मुश्किल है। 
मोहाली के सिविल सजर्न मंजीत सिंह ने कहा कि कुछ समाज विरोधी तत्व  सोशल मीडिया पर कोरोना वायरस को लेकर झूठी जानकारी फैला रहे हैं और लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि मोहाली सिविल अस्पताल में कोरोना वायरस के मरीजों के अंग निकालने और मौतों से संबंधित एक कथित ऑडिया क्लिप सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई है। सिंह ने इस अंग निकालने की अफवाह को पूरी तरह से बेबुनियाद  बताया और कहा कि अधिकारी उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे जो ऐसे झूठ फैला रहे हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस बाबत पंजाब पुलिस के साइबर अपराध प्रकोष्ठ में एक शिकायत भी दर्ज कराई है

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