लद्दाख बॉर्डर पर स्थिति लगातार तनावपूर्ण होती जा रही है. भारत और चीन ने अब टैंकों की तैनाती कर दी है. भारत हर मोर्चे पर चीन पर नजर रख रहा है, ताकि वक्त आने पर उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके.

हाइलाइट्स:

  • विस्तारवाद नीति से बाज नहीं आ रहा चीन
  • भारत के क्षेत्र में सड़क बनाना चाहता है चीन, भारत ने बढ़ाई सेना
  • सेना के सूत्रों ने कहा, यहां हम बहुत मजबूत स्थिति में हैं कोई टेंशन वाली बात नहीं
  • भारत ने हैवी टैंक और सैनिकों की बढ़ोत्तरी कर दी है

ड़ोसी मुल्क चीन (India China Faceoff) अपनी ओछी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। भारत और चीन के बीच कूटनीतिक और सैन्य स्तर की बैठकें चल रही हैं इसी बीच चीन लगातार सरहद के पास सेना की बढ़ोत्तरी करता जा रहा है। इसके जवाब में भारत ने भी नॉर्दन लद्दाख इलाके में सेना की तैनाती बढ़ा दी है।

भारतीय सेना से तैनात किए हैवी टैंक
सरकारी सूत्रों ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया, ‘हमने डीबीओ और डेपसांग मैदानी क्षेत्र में टी -90 रेजमेंट सहित सेना और टैंकों की बहुत भारी तैनाती की है।’ सूत्रों के मुताबिक काराकोरम दर्रे (PP-3) के पास डेपसांग मैदानों के पास पैट्रोलिंग पॉइंट 1 से तैनाती की गई है। बख़्तरबंद तैनाती ऐसी है कि चीनी को वहां काम करना मुश्किल होगा।

विस्तारवाद नीति से बाज नहीं आ रहा चीन
सरकारी सूत्र ने बताया कि टैंकों की मौजूदगी के चलते चीन के सैनिक कोई भी हिमाकत करने से बचेंगे। उनके लिए इस स्थिति में ऑपरेट करना मुश्किल होगा। डीओबी और देपसान्ग प्लेन्स के दूसरी तरफ के इलाके में चीन ने जब अपना इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना शुरू किया था, तब यहां भारतीय सेना की माउंटेन ब्रिगेड और आर्मर्ड ब्रिगेड ही निगरानी करती थी। अब इस इलाके में 15 हजार से ज्यादा जवान और कुछ टैंक रेजीमेंट भी तैनात कर दी गई हैं।

भारत की चीन को दो टूक, LAC पर तनाव वाले सभी स्थानों से सैनिकों को पूरी तरह पीछे हटाओ

सड़क मार्ग को जोड़ना चाहता है चीन
इस क्षेत्र में चीनियों के प्रमुख इरादों में से एक अपने TWD बटालियन मुख्यालय से DBO सेक्टर के सामने काराकोरम पास क्षेत्र तक एक सड़क का निर्माण करना और वहां की बटालियन को जोड़ना है। सूत्रों ने कहा कि कनेक्टिविटी योजना को पहले भी नाकाम कर दिया है। सूत्रों ने कहा कि एक छोटा पुल पीपी -7 और पीपी -8 के पास एक नाला पड़ता है जोकि भारतीय क्षेत्र के अंदर आता है वहां पर भी चीन ने पुल का निर्माण किया था, लेकिन इसे कुछ साल पहले भारतीय सैनिकों द्वारा तोड़ दिया गया था।

By Desk

error: Content is protected !!