कांग्रेस ने केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए प्रमुख अध्यादेशों पर चर्चा और पार्टी का रुख तय करने के लिए बुधवार को पांच सदस्यीय समिति का गठन किया। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) द्वारा गठित इस समिति के संयोजक जयराम रमेश होंगे। इसमें ऐसे किसी भी नेता का नाम नहीं है, जो बीते दिनों चिट्ठी लिखने के कारण चर्चा में आए थे। इस कमेटी में वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम और दिग्विजय सिंह को समिति का सदस्य बनाया गया है। कांग्रेस के लोकसभा सदस्य गौरव गोगोई और डॉक्टर अमर सिंह भी इस समिति में शामिल होंगे। वेणुगोपाल ने कहा कि यह समिति केंद्र की ओर से जारी प्रमुख अध्यादेशों पर चर्चा और पार्टी का रुख तय करने का काम करेगी।

इन नेताओं को मिली कमेटी में जगह

पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा 26 अगस्त को हस्ताक्षरित एक विज्ञप्ति के अनुसार, कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष ने केंद्र सरकार द्वारा घोषित प्रमुख अध्यादेशों पर पार्टी के रुख पर चर्चा करने और तैयार करने के लिए एक पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में जिन नेताओं को रखा गया है उनमें पी चिदंबरम, दिग्विजय सिंह, जयराम रमेश, डॉ अमर सिंह और गौरव गोगोई शामिल हैं। इस समिति के संयोजन की जिम्मेदारी जयराम रमेश को सौंपी गई है। यह कमेटी केंद्र की ओर से जारी प्रमुख अध्यादेशों पर चर्चा और पार्टी का रुख तय करने का काम करेगी।

पी चिदंबरम उन  नेताओं में से एक हैं जिनसे सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह और राहुल गांधी ने जेल में मुलाकात की थी। चिदंबरम पार्टी के मामलों पर पूरी तरह से काम रहे हैं और सोनिया गांधी की मदद के लिए संभावित उपाध्यक्ष या समिति के सदस्यों में से एक बनने की भी अटकलें लगाई जा रही हैं। एक ओर जहां चिदंबरम आर्थिक मामलों के जानकार हैं तो वहीं उनके पास कानूनी जानकारियां भी हैं। चिदंबरम के चयन को वकील कपिल सिब्बल की जगह माना जा रहा है। सिब्बल हाल ही में राजस्थान संकट के दौरान अदालत में पार्टी का पक्ष रखा था। सिब्बल उन 23 लोगों में थे, जिन्होंने चिट्ठी लिखी थी।

दिग्विजय सिंह की नियुक्ति से आनंद शर्मा और आजाद को संदेश इसके साथ ही दिग्विजय सिंह की बात करें तो मध्य प्रदेश संकट के बाद कई लोगों का मानना था कि उनका करियर राजनीतिक रूप से खत्म हो गया क्योंकि उन्हें  ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी से जाने के लिए जिम्मेदार माना जाता था। उनकी नियुक्ति गुलाम नबी आज़ाद और आनंद शर्मा के लिए एक संदेश माना जा रहा है।वहीं बात जयराम रमेश की करें तो उन्हें समिति का संयोजक बनाया गया है। रमेश की समिति में वापसी को आनंद शर्मा के लिए झटका माना जा रहा है। इसके साथ ही यह संदेश भी गया है कि सोनिया गांधी अब भी रमेश पर यकीन करती हैं।
मनीष तिवारी की जगह अमर सिंह!समिति में पूर्व आईएएस अधिकारी और फतेहगढ़ साहिब पंजाब  से सांसद अमर सिंह भी सदस्य बनाए गए हैं। अमर सिंह, मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम रहे दिग्विजय सिंह के प्रिंसिपल सेक्रेटरी थे। डॉ। सिंह ने शून्यकाल के दौरान लोकसभा में अध्यादेशों का मुद्दा उठाया था। माना जा रहा है कि उनकी नियुक्ति पंजाब के ही एक अन्य सांसद मनीष तिवारी की जगह हुई है।इस समिति में असम कांग्रेस के नेता गौरव गोगोई को भी शामिल किया गया है। राहुल के करीबी माने जाने वाले गोगोई हिंदी और अंग्रेजी दोनों में कुशल हैं। हालांकि उनकी नियुक्ति को जितिन प्रसाद और शशि थरूर को जवाब माना जा रहा है।


इन नेताओं की चिट्ठी पर है दस्तखतगौरतलब है कि कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) ने सोमवार को सोनिया गांधी और राहुल गांधी के हाथ हरसंभव तरीके से मजबूत करने का निर्विरोध प्रस्ताव पारित किया था और यह भी स्पष्ट किया गया था कि किसी को भी पार्टी और उसके नेतृत्व को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वालों में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, शशि थरूर, मनीष तिवारी, आनंद शर्मा, पीजे कुरियन, रेणुका चौधरी, मिलिंद देवड़ा और अजय सिंह शामिल हैं।2इनके अलावा सांसद विवेक तन्खा, सीडब्ल्यूसी सदस्य मुकुल वासनिक और जितिन प्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, राजेंद्र कौर भट्ठल, एम वीरप्पा मोइली और पृथ्वीराज चव्हाण ने भी चिट्ठी पर दस्तखत किए हैं।उत्तर प्रदेश प्रदेश कांग्रेस समिति (पीसीसी) के पूर्व अध्यक्ष राज बब्बर, दिल्ली पीसीसी के पूर्व अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली, हिमाचल प्रदेश पीसीसी के पूर्व अध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर, बिहार अभियान के मौजूदा अध्यक्ष अखिलेश सिंह, हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष कुलदीप शर्मा, दिल्ली विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष योगनंद शास्त्री, पूर्व सांसद संदीप दीक्षित के हस्ताक्षर भी चिट्ठी पर हैं।

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