कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की सोमवार को सात घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद तय हुआ है कि फिलहाल सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी। नेतृत्व के मुद्दे पर कांग्रेस के दो खेमों में बंट जाने की स्थिति बनने के बीच पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई CWC की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हुई। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि जो हुआ उससे वह आहत जरूर हैं लेकिन, सभी लोगों से मिलकर काम करने का आह्वान किया है। 

कांग्रेस कार्यसमिति की आज की बैठक के समापन के दौरान 73 वर्षीय सोनिया गांधी ने कहा कि वह आहत हैं लेकिन उनके अंदर किसी को लेकर दुर्भावना नहीं है। बता दें कि पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी शिकस्त के होने के बाद राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था। जिसके बाद सोनिया गांधी को कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया था।   

सोनिया गांधी ने कहा, “मैं आहत हुई हूं लेकिन वे (चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वाले वरिष्ठ नेता) भी मेरे सहयोगी हैं। जो हुआ सो हुआ, हमें साथ मिलकर काम करना चाहिए।” इससे पहले, CWC की बैठक की शुरुआत में सोनिया गांधी ने कहा था कि वह कांग्रेस के शीर्ष पद पर नहीं रहना चाहती हैं। दिन समाप्त होने के साथ यह बात यह तय हो गई कि फिलहाल कांग्रेस की कमान सोनिया गांधी के हाथों में ही रहेगी। हालांकि, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के लिए नए अध्यक्ष की खोज शुरू करने के लिए 6 महीने की समयसीमा निर्धारित की गई है। बैठक के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वाले नेताओं में से एक गुलाम नबी आजाद ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि वह बैठक में “निकले निष्कर्ष से संतुष्ट हैं।” सूत्रों ने कहा कि बैठक के दौरान किसी भी कांग्रेस नेता ने गांधी परिवार के नेतृत्व की आलोचना नहीं की। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें सोनिया गांधी से पद पर बने रहने के लिए कहा गया है और अगर ऐसा संभव न हो तो अन्य नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में राहुल गांधी की वापसी की बात कही। सीडब्ल्यूसी की बैठक में मौजूद राहुल गांधी ने चिट्ठी भेजे जाने को लेकर गुस्सा जताया। उन्होंने कहा कि जिस वक्त पत्र भेजा गया उस समय सोनिया गांधी बीमार थीं। उन्होंने पत्र के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘जब कांग्रेस मध्य प्रदेश और राजस्थान के सियासी संकट का सामना कर रही थी, जब अध्यक्ष बीमार थीं, तब ही चिट्ठी क्यों भेजी गई।’ 

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