तीन महीने में लुधियाना से देशभर में सप्लाई हुईं 34 लाख साइकिलें, हर दिन बिकीं 37 हजार साइकिल

कोरोना काल में साइकिल लोगों काे खूब पसंद आई। मई से जुलाई तक साइकिल प्रोडक्शन के हब लुधियाना ने 90 दिनों में देश भर में 34 लाख साइकिलें बेचीं यानी हर रोज करीब 37 हजार साइकिलें। दो महीने तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट, जिम, हेल्थ क्लब बंद होना भी साइकिल की मांग बढ़ने का कारण रहा। ऑल इंडिया साइकिल मैन्युफैक्चर्रर्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी जनरल डॉ. केबी ठाकुर ने कहा कि 58 साल में मैंने अब तक अपने जीवन में साइकिल की इतनी मांग कभी नहीं देखी।

बता दें कि भारत में हर साल 2.20 करोड़ साइकिल का उत्पादन होता है जिसमें 90% साइकिलें लुधियाना में बनती है। दूसरी तरफ, साइकिल इंडस्ट्री अभी भी लेबर की कमी से जूझ रही है। कोविड-19 की गाइड लाइन के चलते 50 से 65 फीसदी क्षमता पर ही काम हो रहा है। संभावना है कि अगस्त के बाद इंडस्ट्री रफ्तार पकड़ लेगी। गौरतलब है साइकिल की 25% बिक्री विभिन्न राज्यों के सरकारी ऑर्डर पर निर्भर होती है, जो फिलहाल बंद है। इसके बावजूद डिमांड दोगुनी बढ़ी है। इसमें 40% मांग गियर साइकिल की हैं।

साइकिल का बढ़ता ग्राफ

महीनासाइकिलें बिकीं
मई6.5 लाख
जून10.5 लाख
जुलाई17 लाख

नोट-इनमें 30% हाई एंड साइकिलें बिकी हैं, आंकड़े 1 मई से 31 जुलाई तक के हैं

इंडस्ट्री के लिए गोल्डन टाइम

हीरो साइकिल्स के सीएमडी पंकज मुंजाल ने कहा कि साइकिल इंडस्ट्री के लिए यह स्वर्णिम समय है। अगर डिमांड की बात करें तो हमारा 2.5 लाख साइकिलों का आर्डर पेंडिंग चल रहा है। मई महीने से इंडस्ट्री में फिर से काम शुरू हुआ था। हम अकेले ही 4 लाख से अधिक साइकिल हर महीने बना रहे हैं। इसमें दूसरे देशों को होने वाला एक्सपोर्ट शामिल नहीं है। आने वाले महीनों में प्रोडक्शन और बढ़ाएंगे।

इयर ऑफ साइकिल इंडस्ट्री

एवन साइकिल्स के एवन साइकिल्स ओंकार सिंह पाहवा ने बताया, ’15 मई से अब तक साइकिल की डिमांड दोगुनी हो गई है। इंडस्ट्री ऑर्डर पूरे नहीं कर पा रही है। पंद्रह-पंद्रह दिन की वेटिंग चल रही है। पार्ट्स और असेसरीज में भी तेजी है। कोविड-19 के चलते फैक्टरियों की क्षमता से 65% प्रोडक्शन हो पा रहा है। हालात सामान्य होने पर सरकारी आर्डर भी मिलेंगे। 2020 को ‘इयर ऑफ साइकिल इंडस्ट्री’ घोषित कर देना चाहिए।’

By Desk

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