कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन में बदलाव के मुद्दे पर पार्टी के दो खेमे में नजर आने की स्थिति बनने के बीच पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक जारी है। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हो रही है। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में सोमवार को पद छोड़ने की पेशकश की, जिसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पार्टी के कई नेताओं ने उनसे पद पर बने रहने का आग्रह किया। सूत्रों के अनुसार, सीडब्ल्यूसी की बैठक आरंभ होने के बाद सोनिया ने कहा कि वह अंतरिम अध्यक्ष के तौर अब काम नहीं करना चाहती। एक सूत्र ने बताया कि इसके बाद मनमोहन सिंह और कुछ अन्य नेताओं ने उनसे आग्रह किया कि वह पद पर बनी रहें।

कैसे शुरू हुआ बवाल?

दरअसल नेतृत्व के मुद्दे पर पार्टी दो खेमे में बंटी नजर आ रही है. सीडब्ल्यूसी की बैठक से एक दिन पहले रविवार को पार्टी में उस वक्त नया सियासी बवंडर खड़ा हो गया जब राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद समेत 23 नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखा. इस पत्र में कांग्रेस नेताओं ने सोनिया से पूर्णकालिक और जमीनी स्तर पर सक्रिय अध्यक्ष बनाने और संगठन में ऊपर से लेकर नीचे तक बदलाव की मांग की थी. इसके बाद खबर आई कि सोनिया ने अध्यक्ष पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की है.

वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी में नेतृत्व के मुद्दे पर सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले नेताओं पर निशाना साधा और कहा कि जब पार्टी राजस्थान एवं मध्य प्रदेश में विरोधी ताकतों से लड़ रही थी और सोनिया गांधी अस्वस्थ थीं तो उस समय ऐसा पत्र क्यों लिखा गया। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में कहा कि जब हम राजस्थान एवं मध्य प्रदेश में विरोधी ताकतों से लड़ रहे थे और सोनिया अस्वस्थ थीं तो उस समय यह पत्र क्यों लिखा गया? उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि राहुल गांधी कह रहे हैं कि ‘हम भाजपा के साथ साठ-गांठ कर रहे हैं’, हमने पिछले 30 वर्षों में भाजपा के पक्ष में कभी बयान नहीं दिया। सिब्बल ने बतौर वकील कांग्रेस को सेवा देने का उल्लेख करते हुए ट्वीट किया, ‘राहुल गांधी का कहना है कि ‘हम भाजपा के साथ साठगांठ कर रहे हैं’। राजस्थान हाईकोर्ट में कांग्रेस पार्टी का पक्ष रखते हुए सफल हुआ। मणिपुर में भाजपा को सत्ता से बेदखल करने करने के लिए पार्टी का पक्ष रखा।’ उन्होंने राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘पिछले 30 वर्षों से किसी मुद्दे पर भाजपा के पक्ष में कोई बयान नहीं दिया। फिर भी ‘हम भाजपा के साथ सांठ-गांठ कर रहे हैं?’ वहीं कांग्रेस प्रवक्ता एवं वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने ट‍्वीट किया कि राहुल गांधी ने सांठ-गांठ की बात तक नहीं की और न ही इस तरह का कोई इशारा किया। थोड़ी ही देर बाद कपिल सिब्बल ने ट‍्वीट किया कि उनकी राहुल गांधी से बात हुई और उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘भाजपा के साथ सांठ-गांठ’ वाली कोई बात नहीं हुई। इसलिये मैं अब अपना पुराना ट‍्वीट डिलीट कर रहा हूं।

पार्टी मुख्यालय के बाहर कई कार्यकर्ता जमा, गांधी परिवार के समर्थन में नारेबाजी

नेतृत्व के मुद्दे पर कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की डिजिटल बैठक आरंभ होने के साथ पार्टी मुख्यालय के बाहर कई कार्यकर्ता जमा हो गए और उन्होंने कहा कि उन्हें गांधी परिवार के बाहर का अध्यक्ष स्वीकार नहीं है। इन कार्यकर्ताओं का हाथों में तख्ती लेकर नारेबाजी करना इस बात का संकेत है कि नेतृत्व के मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर टकराव बढ़ रहा है। इन कार्यकर्ताओं ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी नेताओं राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के समर्थन में नारेबाजी की। एक कार्यकर्ता ने तख्ती ली हुई थी, जिस पर लिखा हुआ था कि ‘अगर गांधी परिवार के बाहर का अध्यक्ष बना तो पार्टी टूट जाएगी।’ कार्यकर्ताओं ने ‘गांधी परिवार के बाहर का अध्यक्ष मंजूर नहीं’ के नारे भी लगाए।

यह था मामला

उल्लेखनीय है कि सीडब्ल्यूसी की बैठक से एक दिन पहले रविवार को पार्टी में उस वक्त नया सियासी बवंडर खड़ा हो गया जब पूर्णकालिक एवं जमीनी स्तर पर सक्रिय अध्यक्ष बनाने और संगठन में ऊपर से लेकर नीचे तक बदलाव की मांग को लेकर सोनिया गांधी को 23 वरिष्ठ नेताओं की ओर से पत्र लिखे जाने की जानकारी सामने आई। नेतृत्व के मुद्दे पर पार्टी दो खेमे में बंटी नजर आ रही है। हालांकि, इस पत्र की खबर सामने आने के साथ ही पंजाब के मुख्यमंत्री अमरेंद्र सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ एवं युवा नेताओं ने सोनिया और राहुल गांधी के नेतृत्व में भरोसा जताया।

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