शिरोमणि अकाली दल के नेता व विधायक बिक्रम सिंह मजीठिया ने कोरोना मरीजों के इलाज को लेकर बड़ा आराेप लगाया है। उन्‍होंने कहा कि कोरोना के एक मरीज के इलाज के लिए निजी अस्पताल में निर्धारित दर से काफी अधिक रकम लेने का मामला सामने लाए हैं। उनका कहना है कि अमृतसर के इस बड़े अस्पताल ने कोरोना पॉजिटिव मरीज के इलाज के लिए 20.47 लाख वसूल किए। इसके बावजूद मरीज की 48 दिन बाद अस्पताल में ही मौत हो गई।

मजीठिया ने लगाया अमृतसर के अस्पताल पर आरोप

मजीठिया ने कहा कि अमृतसर निवासी शविंदर सिंह 25 जून को अमृतसर के एक निजी अस्पताल में भर्ती हुए थे। लंबे इलाज के बाद उनकी 13 अगस्त को मौत हो गई। वह 48 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहे। सरकारी दरों के मुताबिक 18 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से बिल 8.82 लाख रुपये ही बनता है, लेकिन अस्पताल ने 20.47 लाख रुपये वसूले। अहम पहलू यह है कि कोरोना, जिसकी दवा मार्केट में नहीं है, उसके लिए अस्पताल ने मरीज के परिजनों से 8.11 लाख रुपये वसूल किए। वार्ड व आइसीयू के फिक्स चार्ज के रूप में 6.66 लाख रुपये वसूले गए।

मरीज के बेटों ने कहा, कोई और बीमारी नहीं थी उनके पिता को

मजीठिया के साथ स्व. शविंदर सिंह के बेटे परिमंदर और राजविंदर सिंह भी थे। उन्होंने बताया कि उनके पिता को कोई अन्य बीमारी नहीं थी। उन्हें केवल सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। आम तौर पर कोरोना का मरीज 21 दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन उनके पिता को 48 दिन तक अस्पताल में रखा गया।

मजीठिया ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए अस्पताल का लाइसेंस रद करने की मांग की है। उधर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि फीस सरकारी रेट के अनुसार ही वसूली गई है। स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिद्धू का कहना है कि परिवार वाले इस मामले में शिकायत करेंगे तो जांच की जाएगी।

By Desk

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